सोमवार, 24 दिसंबर 2012

ओ बचपन दीवाने

आ बापस तू आजा, ओ बचपन दीवाने,
न तोडू मै तुझसे ये रिश्ते पुराने ।
तू साथी है तब का जो कुछ था वो छोटा,
न आता समझ में जो दुनिया में होता,
तू ही मुझको समझा तू ही मुझको जाने,
दवे पाव से बैठा करता सिरहाने ।
मेरे होंठ सुबके हुआ दुःख तुझे भी,
मै संभला तेरे संग तेरे संग गिरा भी, 
दिखाता था दुनिया के रंगी फ़साने,
या सपनो में आता था मुझको हँसाने ।
ये कद क्यूँ बड़ा है क्योँ होती हया है,
ये क्या हो रहा है ये क्या माज़रा है,
तू बचपन भला था मज़ा ही मज़ा था,
मेरा हर खिलौना बस तुझसे सजा था,
पता अपना दे दे मै आऊं बुलाने,
या बापस तू आजा ओ बचपन दीवाने ।

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