सोमवार, 31 दिसंबर 2012

"आकांक्षा"

उठ खड़े हुए है हम, नए साल के स्वागत में ।
कोई अभाव न रह जाये, नब आगत के स्वागत में ।।
आंखे मलता सूरज आया फैले किरणों सी खुशियाँ ।
जीवन तरंग बज उठे गगन , नब आगत की आहट में ।।
उज्जवल भविष्य के आने पर अधरों पर मुस्काने तैरे ।
ढांढस बंध पाए मानव को, दिए जले गर्त अंधियारों में ।।
इस जीवन में ही खोज सकें, जीवन रहस्य अनसुलझे ।
हो दया शक्त , निस्वार्थ प्रेम, जगती के हर जीवित में ।।
न हो अधीर ये आस करे, जीवन सुखी और शांत बने ।
हर क्षुब्ध को तृष्णा मुक्त करे प्रभु नए साल के आगत में ।।

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