शुक्रवार, 24 मई 2013

हमसफ़र

ये जो नजरें मिली ये लगा दिल गया
एक तू जो मिला ये जहाँ मिल गया
हर छुअन में बफा है हवा में महक, हर तरफ तू ही तू में मेरा 'मैं' गया
कल तलक ये हवा ये फिजा और थी
रातें छोटी थी काली  अदा और थी
अब जुदा है समां रातें रंगीन है, जैसे इसको  तेरा आसरा मिल गया
जाने कितने मिले जाने कितने गए
भूल की धुल में सब के सब मिल गए
मैंने चाहा तुझे भूल से भूलना, मेरी सांसो से पहले ये दिल रुक गया
हर मुसाफिर को इतनी दुआ चाहिए
साथी तुझ सा मेरी सी बफा चाहिए
इन निगाहों ने बरसो था ढूँढा जिसे तुझको देखा तो वो 'हमसफ़र' मिल गया

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