शुक्रवार, 24 मई 2013

यादें याद आती है

हर वक़्त सोचता हूँ टीस कहीं होती है
अश्क बहते नहीं पर सांसे सर्द होती है
वक़्त कटता नहीं बस काटता ही रहता है
प्यार का ऐसा अक्स प्रीत होती है
 
मोहब्बत कितनी करो काफी नहीं होती 
इस गुणा भाग में सांसे बाकी नहीं होती
उम्र घटती तो जुड़ता है आशियाना 
रात को जिस्म सोता है मगर बाहें नहीं सोती 

बस कोई दर्द चाहिए जिन्दगी के लिए
प्यार के बदले ही आये मगर किसी के लिए 
नाम लेकर अगर पहचाना तो क्या पहचाना
बात है सांस् समझ जाये किसी बू के लिए 

याद तुम्हे करके गुस्ताखी कर बैठे, 
एक हिचकी हर याद की खातिर कर बैठे
रख ली एक तस्वीर बना कर दिल पर भी
सोये तो उसे ख्वाब में शामिल कर बैठे

 क़भी दो लफ़्ज़ ही काफी हैं बताने के लिए 
कहीं कोई उम्र लग जाती है जताने में
कोई पा जाये तुझे देख पूरे दिन की ख़ुशी
तो हर्ज ही क्या है उसे देख मुस्कुराने में 

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