गुरुवार, 13 दिसंबर 2018

आसरे की आस


तेरे आसरे की आस ने आंसू रोके
वर्ना इस ख़्वार को जीने की वजह क्या होती
मेरा हर दर्द दुआ  बनके मिला है तुझसे
तेरे बिन रूह के जख्मों की दवा क्या होती
हंस के मिलता ही गया देख न पाए कोई आँखों की नमी
खुशियाँ लुटाने के सिवा तेरी रजा क्या होती

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