गुरुवार, 13 दिसंबर 2018

आसरे की आस


तेरे आसरे की आस ने आंसू रोके
वर्ना इस ख़्वार को जीने की वजह क्या होती
मेरा हर दर्द दुआ  बनके मिला है तुझसे
तेरे बिन रूह के जख्मों की दवा क्या होती
हंस के मिलता ही गया देख न पाए कोई आँखों की नमी
खुशियाँ लुटाने के सिवा तेरी रजा क्या होती

गुरुवार, 24 अगस्त 2017

बरसात और मुलाकात

जब मुलाकात हो तब बताना उसे 
मेरी हर एक बफा दे के आना उसे 
मै तरसता हु जितना बरसना वहां 
अपनी बूंदों से कम ही भिगाना उसे 

मेरे ख़त आज भी है पड़े मेज पर 
बिन बताये पता वो गयी रूठ कर
मैंने कितना था चाहा उसे टूट कर 
तुझको सब है पता ये पता ना उसे ,

जिस्म जिन्दा सही आँख पुरनम सही
वक़्त चलता रहा याद ठहरी रही
डूबता मैं रहा तू डुबाती रही
प्यार की सांसें सिसकी सुनाना उसे

माना रहबर है तू मैं खताबार हूँ
जो भी दे लो सज़ा सब मैं तैयार हूँ

अब भी वो ही बफा मैं बफादार हूँ

जब मुलाकात हो सब बताना उसे 

गुरुवार, 7 मई 2015

मैं शायर तो नहीं

रहा तनहा हूँ बहुत कोई बड़ी बात नहीं
रंज किस किस का करूं कोई नई बात नहीं
हाल ख़ुद कहता हूँ खुद सुनता हूँ खुद ही समझ लेता हूँ
खुदा से जिक्र करूं ऐसी बड़ी बात नहीं

मैंने आँखों से कहा बस तेरा दीदार करे,
होंटो से चूम ले सांसों में तेरा प्यार भरे
वक़्त को रोक न पाया तो कोई बात नहीं
हर जनम तेरे लिए  साथ जिए प्यार करे 

मेरा दिल प्यार में था मुझको बताया ही नहीं
हाल ए दिल मेरे दिल ने मुझको सुनाया ही नहीं
ख़ुदकुशी खुद ख़ुशी से कर चुका किसी के लिए
तड़पता रह गया पर मुझको सताया ही नहीं

दौर गुजरे कई ऐसी गर्दिश न थी
हाँ मोहब्बत तो थी ऐसी कातिल न थी
तेरी चौखट को चूमा मिले कुछ सुकून
हूक उठती गई कोई राहत न थी

इस भरी भीड़ में क्यों मुझको ही बेजार करें 
सुर्ख आँखों के लाल डोरे मुझको ही तार तार करें 
यूँ तो देखी है कई काजल भरी आँखों की नजाकत
दिल इन्ही आँखों पे क्योँ खींचता आ प्यार करें प्यार करें

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