सोमवार, 24 मई 2021

क्या साथ आओगे

अगर उलझे रहे खुद में तो भला क्या बताओगे
मैं जितना दिल लगाऊंगा तुम उतना दिल बचाओगे
मुरव्वत बेमुरव्वत होना मुश्किले है बाद की
इस पहली मुलाकात को सोचो कैसे बिताओगे
माना इश्क तेरा कतरा नही समंदर है
मैं अगर घेर लू बाहों में तो क्या थम जाओगे
अब हमें दूर तक जाना है इन्ही राहों पर
तुम मेरा हाथ थामे बिन थके चल पाओगे
अब तेरे होंठो पर मुस्कान बने रहना है
तो ये बादा रहा मुझको वहां सजाओगे





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