दुआ मुफ्त मिलती नही, मनानी पड़ती है
खुशियां चलकर आती नही, कमानी पड़ती है
किस्मत भी अजीब है जिन हाथ की लकीरों में हो
उन्ही हाथो से ही रोज बनानी पड़ती है
हम सफर में रहे हमसफर के इंतजार में
कोई तो होगा हम सा,इतने बड़े से संसार मे
गलत मैं ही हमेशा रहा, इस बार का क्या गम
ऐ खुदा अकेला ही बनाया, क्या इतना बेकार मैं
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