शुक्रवार, 30 जुलाई 2021

न्यौछावर मत करना

दुनिया मे दो लोग तुम्हे जान से भी प्यारे है
एक तो पापा तुम्हारे मगर दूसरा कौन है
हम से क्यूं हिचकिचाते हो बताने में
आखिर क्यों, सवाल का जवाब, मौन है

उसके शौक, आदत, रंग ढंग,
और कितना कुछ यूं ही बताते रहते हो मुझे
बातों में बस बो ही वो तुम्हारे पर
पर्दे में ढका चेहरा नही, पर्दा दिखाते रहते हो मुझे

मेरे चुटकुले भी अब खुलकर हंसा नही पाते 
मगर खुद बेसाख्ता मुस्कुराने लगते हो
पता नही, ऐसा क्या है उसमें ख़ास जो
आजकल बड़ा महके महके से रहते हो

पहले तो मेरे आने से पहले तुम जान जाती 
पर अब तो मेरे जाने का भी ख्याल नही
प्यार के निरे नशे में हो जैसे
मेरी तो मेरी खुद की भी देखभाल नही

एकटक मुझे देख रही हो जैसे
 मुझमे भी उसकी ही तलाशी हो
कोई राज सा लगता है हँसने में 
जब पूछता हूं और मेरी लाडो कैसी हो

मेरी दोस्ती है वो जो तुम कहो तो
रात या दिन नही देखेगी तेरे लिए
कोई वादा नही, ना सही, फिर भी
यारी मेरी, कोई शर्त नही रखेगी तेरे लिए

मैं नही कहता प्यार मत करो उससे
बस एक तरफा मत करना
मेरी जान है तुम्हारी भोली हंसी में
प्लीज हाथ जोड़ता हूँ, उस पर न्यौछावर मत करना

प्रवीनशर्मा
मौलिक स्वरचित रचना

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