मनवा लेखक हम तो सेवक
रहमत हुई की इल्म ने पहचाना है मुझे, हर शख्श की तक़दीर यूँ रोशन नहीं होती....
गुरुवार, 17 जून 2021
जुदा
मेरा महबूब थोड़ा जुदा है सबसे,
गुस्सा करके भी सब छुपा लेता है
वो जानता है हम तड़प कर रह जाएंगे
रूठे तो मुस्कान जरा कम देता है
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