मनवा लेखक हम तो सेवक
रहमत हुई की इल्म ने पहचाना है मुझे, हर शख्श की तक़दीर यूँ रोशन नहीं होती....
बुधवार, 23 जून 2021
नादान
मुझको ग़लतफ़हमी हो गई कि
तुझको तुझसे ज्यादा जानता हूं मैं
अब तो मुझे अपने दिल पर तरस आता है
उस नादान ने बताया भी नही,तुझे क्या मानता हूं मैं
दिल बैठ कर मेरे सिरहाने, तेरा जिक्र करने से डरने लगा
फिर से न कह दूँ अब बस, उसे अच्छे से जानता हूं मैं
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