मनवा लेखक हम तो सेवक
रहमत हुई की इल्म ने पहचाना है मुझे, हर शख्श की तक़दीर यूँ रोशन नहीं होती....
शनिवार, 19 जून 2021
अकड़ू
प्यार के सिवा मुझे कुछ नही आना है
उसकी नाक पर गुस्से का ठिकाना है
समझाऊँ कैसे अकड़ू को, कहता है
दूर से ही बताओ तुमको जो बताना है
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