गुरुवार, 3 जून 2021

धरती माँ

कुदरत के कानून को तोड़ो मत इन्सान।
तुम दोगे तो ही मिले जीवन का सम्मान।।
ये धरती तेरी नही बस कब्जा कुछ रोज ।
क्यों खोया है स्वपन में रख ले कुछ तो होश।।
जंगल उपवन ये नदी देते जीवन दान ।
वस्त्र फाड़कर भूमि के करता क्यों अपमान।।
धरती माँ ने पालकर कर दिया पूरा फर्ज ।
दूध नही तो गोद का कुछ उतार लें कर्ज।।
पशु और इंसान में कैसे करेगा भेद।
थाली में तू खाय जो उसी में करता छेद।।
मां का आँचल जाने सब माटी नही बेजान।
अपनाए तब भी तुझे छोड़ जाए जब प्राण।।

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