मनवा लेखक हम तो सेवक
रहमत हुई की इल्म ने पहचाना है मुझे, हर शख्श की तक़दीर यूँ रोशन नहीं होती....
मंगलवार, 22 जून 2021
कितना बुद्धू हूँ मैं
कितने बुद्धू हो तुम
मुझे पहले से पता था कि तुम्हे पता नही है फिर भी तुमसे पता करने को कहकर पता कर रही थी कि तुम्हे कुछ पता है या नही, अब पता चला तुम्हें!!!
अब तक मुझे पता लग गया था कि मैं कितना बुद्धू हूँ
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