जब मुलाकात हो तब बताना उसे
मेरी हर एक बफा दे के आना उसे
मै तरसता हु जितना बरसना वहां
अपनी बूंदों से कम ही भिगाना उसे
मेरे ख़त आज भी है पड़े मेज पर
बिन बताये पता वो गयी रूठ कर
मैंने कितना था चाहा उसे टूट कर
तुझको सब है पता ये पता ना उसे ,
जिस्म जिन्दा सही आँख पुरनम सही
वक़्त चलता रहा याद ठहरी रही
डूबता मैं रहा तू डुबाती रही
प्यार की सांसें सिसकी सुनाना उसे
माना रहबर है तू मैं खताबार हूँ
जो भी दे लो सज़ा सब मैं तैयार हूँ
अब भी वो ही बफा मैं बफादार हूँ
जब मुलाकात हो सब बताना उसे