बुधवार, 23 जून 2021

नादान

मुझको ग़लतफ़हमी हो गई कि
तुझको तुझसे ज्यादा जानता हूं मैं
अब तो मुझे अपने दिल पर तरस आता है
उस नादान ने बताया भी नही,तुझे क्या मानता हूं मैं
दिल बैठ कर मेरे सिरहाने, तेरा जिक्र करने से डरने लगा
फिर से न कह दूँ अब बस, उसे अच्छे से जानता हूं मैं

क्या इतना बुरा हो गया हूं मैं

देखकर मुस्कुराते भी नही
क्या इतना बुरा हो गया हूं मैं
हर बार आप-आप कहती हो
सच्ची, इतना बड़ा हो गया हूं मैं
बचपन मे तो छोटी रजाई इतनी लंबी बातें थी तेरी
अपने पैरों पर खड़े होने से तन्हा सा हो गया हूं मैं

रश्क खाते थे दोस्त मेरे
जब हम साथ चलते थे
कितने अच्छे थे दिन
तेरे गम मेरी खुशी से गले मिलते थे
अब तेरी चुप्पी मेरे दिल में चीखती चिल्लाती है
कभी क्या था तेरे लिए, अब क्या हो गया हूँ मैं

कभी दो पल बैठ जा, इल्तजा है
इतनी दूरी, ऐसी क्या वजह है
तेरे चेहरे पर जिसने पहले की रंगत देखी हो
उसको बेनूर देख कर, कितनी बार मर गया हूं मैं

माना मैं तेरा सगा नही कोई
पर सच मान दिल मे दगा नही कोई
ले मेरा सर झुका है तेरे आगे, थाम ले या काट दे
मैं तेरा दोस्त नही फिर, जो उफ भी कर गया हूँ मैं

ए खुदा, किसी को ऐसा बचपन न दे
बचपन दे तो ऐसी दोस्त ना दे
दोस्त दे तो फिर छूटने की वजह न दे
वजह दे तो फिर जिंदगी ना दे

मैंने जिस की खुशी के लिए, जिंदगी उधार की तुझसे
क्यों उसकी एक हंसी के लिए तरस गया हूं मैं



प्यार का लिफाफा

जिंदगी के पन्नो पर मुस्कुराहट का जिक्र तक नही 

तुम आये तो बंजर में कलियाँ चटक गई

अब तक किसी को मेरी फिक्र तक नही

तुम आये तो हमपर सभी नजरें टिक गई

आंखे लड़ी तो डर गए, प्यार का लिफाफा खुल न जाये

इसलिए नजरें बचाई मगर पलके झुक गई

मंगलवार, 22 जून 2021

कितना बुद्धू हूँ मैं

कितने बुद्धू हो तुम 
मुझे पहले से पता था कि तुम्हे पता नही है फिर भी तुमसे पता करने को कहकर पता कर रही थी कि तुम्हे कुछ पता है या नही, अब पता चला तुम्हें!!!
अब तक मुझे पता लग गया था कि मैं कितना बुद्धू हूँ

नींदे तक चली गई

कहते है अपनो को सीने से लगाओ
तो आराम आ जाता है
हमने अपना समझ लगाया तो नींदें तक चली गई


शॉर्ट्स

जिंदगी अगर चार दिन की है
तो एक दिन के लिए हमारे हो जाओ
यकीं है मुझे, उसके बाद तुम गिनती भूल जाओगे

इतनी बाते सीने में छुपा कैसे पाते हो
यहाँ तो थोड़ी सी सांस के बाद हवा को भी जगह नही रहती

कितना मुश्किल होता है 
अपनी मोहब्बत से दूर रहना
उससे भी मुश्किल होता है
आपको मोहब्बत करने वाले को दूर करना

छोटे छोटे ख्वाब बुने थे आपके
बेसब्री इतनी थी आज आपसे मिलने की
बस दो शब्द ही कहने थे आपसे लेकिन
महीनों तक डॉक्टरी की थी आपसे कहने की


तुम भी बेताब थी मैं भी बेसब्र सा
और लोग किसी धुएं के इंतजार में
मैंने तुमको देखा,तुम मुस्कुरा गई
लो आज आ गई खबर अखबार में

बहरहाल लोग सूंघ रहे है मजनूँ का पता
एक हम है उसकी फुरकत को सीने से लगाये बैठे है
यकीं होता नही देखकर भी उनको
एक वो है मेहंदी फुरसत से हाथों में सजाये बैठे है

एक दिल दिया था खुदा ने ,उसको भी गुमा दिया
करवटें बदलते है अब, उफ क्या गुनाह किया
खराब कर ली छोटी सी जिंदगी
छोटे तिल के चक्कर मे कीमती दिल भुला दिया

बदनामो के सरताज थे हम,
उनकी गली में गुजरते गुजरते आम हो गए
बस देखते थे खिड़की से हमे
इसलिए वो मेरे नाम से बदनाम हो गए















रविवार, 20 जून 2021

पलायन का दर्द

लौट कर चले आये
वहाँ रह कर भी क्या करते
कोई अपना नही हो जहाँ
वहाँ मर कर भी क्या करते

लोग दूर से पूछते थे, कैसे हो भाई
थक गए अपना हाल समझाते, क्या करते

रास्ता,मंजिल तरीका सब पता था मगर
पता नही था दूरी इतनी हो जायेगी, क्या करते

सिवा हमारे दुनिया ही घर मे बैठी थी
दुखी थे सभी, हम दुख के अचार का क्या करते

जिंदगी छोटी सी है, इसलिए छोटे खाब देखे थे
पर रात इतनी लंबी हो गई, भला क्या करते

मुँह देखने को तरस गए अपनो का
मौत की सवारी भी मिली चढ़ लिए, क्या करते

माँ के आंसू, बहन की राखी, बीवी की चूड़ियां
कितना कुछ छुप गया आंसुओं में, क्या करते

सोचते थे सुबह आएगी कोई, पर 
दिलासे भी दिल से कहाँ लगते थे, क्या करते

लौट कर चले आये भला क्या करते




मेरे बाबू जी

जिसके बिना मेरा नाम अधूरा
जिसके साथ मेरा परिवार पूरा

वो छत है बाकी सब दीवारें है
एक उसने पूरे घर के सपने सँवारे है

वो माँ से कम दिखते है घर मे
कितना कुछ कह देते है छोटी छोटी बातों में

उनके हाथों से बहुत मार खाई है
सख्ती में भी उनके प्यार की मिठाई है

बहन को कितना ज्यादा प्यार जताते है
इसी तरह नारी की इज्जत करना सिखाते है

कुछ पैसो को देने के लिये कितना टहलाते है
दुनिया मे पैसो की अहमियत इसी तरह बताते है

उन्हें कुछ पता नही होता, पूछते है शाम को माँ से
फिर भी बचा लेते है, इस काटो भरे जहाँ से

और कुछ नही बस कहना इतना है
मुझे बड़े होकर बस उनके जैसा बनना है

शनिवार, 19 जून 2021

अकड़ू

प्यार के सिवा मुझे कुछ नही आना है
उसकी नाक पर गुस्से का ठिकाना है
समझाऊँ कैसे अकड़ू को, कहता है
दूर से ही बताओ तुमको जो बताना है

शुक्रवार, 18 जून 2021

प्रेम किया नही मुझे हुआ

सती शिव संबाद प्रथम मिलन

माना तुमने मुझसे प्रेम किया
प्रेम ने मेरा भी मन छू लिया

एक फ़क़ीर हूँ मैं, जानती हो ना

तुम्हारा क्या भविष्य हुआ
मेरे साथ बस धुआं ही धुआं

मैं वन का घुमक्कड़ साधू 
मेरे पास कुछ नही ,तुम्हे क्या दूँ

तुम दक्षसुता हो, मानती हो ना

फिर भी कैसा भूत सवार किया
निज मात पिता का विचार किया

मुझे सुख और दुख माटी के समान 
मेरे पग में कंकर को पुष्पो का मान

क्या कोमल हृदय से बैराग्य चाहती हो ना

जाओ सब भूलकर, अब तक जो किया सो किया
भूल जाना कभी तुमने किसी से प्रेम किया

हे नाथ, आप का आदेश सर माथे
मैं लौट जाउंगी, अपना मत बता के

विरक्ति का विधान चाहते है ना

मैं भूल जाउंगी, अब तक जो हुआ सो हुआ
सिवा इसके की मुझे आपसे प्रेम हुआ

मैंने दिन नही क्षण जिये है आपके लिए
मैं प्यासी भटक रही कब से, एक बूंद प्रेम का पिये

समस्या का समाधान चाहते है ना

मैं समस्या नही हूँ, संगिनी रहूंगी
राग आपका अन्यथा बैरागनी रहूंगी

माना आप अंतहीन हो बिश्वेस्वर
प्रेम मेरी स्वांस है नही कोई ज्वर

कितने त्याग किये अब एक और चाहते है ना

ऐश्वर्य, महल, परिवार सब तज दिए
प्रेम परीक्षा के लिए सब व्रत लिए

बस यही तक आप मेरे थे दुख नही
पर मैं आपकी रहूंगी सदा सत्य यही

मैं सती हूँ सती, अगर मेरे प्रेम में सत है ना

तो अब मैं नही आप कहोगे प्रेम से प्रेम हुआ
क्योंकि मैंने प्रेम किया नही आपसे प्रेम हुआ



गुरुवार, 17 जून 2021

जुदा

मेरा महबूब थोड़ा जुदा है सबसे,
गुस्सा करके भी सब छुपा लेता है
वो जानता है हम तड़प कर रह जाएंगे
रूठे तो मुस्कान जरा कम देता है

बुधवार, 16 जून 2021

बदनाम

एक शाम को जो उसके नाम कर दिया
इस गुनाह पर गुमनाम को शहर ने बदनाम कर दिया
नम आंखो ने मुस्कुरा कर कहा मुझे, अब और कुछ नही
तूने मेरे साथ बदनाम होके मेरा काम कर दिया

सोमवार, 14 जून 2021

एक और दीवाना

बड़ी दूर से आये थे नजारा करने
तेरी झलक भर से जिंदगी का गुजारा करने
तुम अपने गुरुर से बौने रहे और हंस दिए
एक और दीवाना आ गया बंजारा बनने

मंगलवार, 8 जून 2021

शर्माजी के अनुभव : पराश्रित

ढलती शाम और पार्क का किनारा
सुकून की तलाश में बैठा मैं बेचारा
स्वार्थियों के हुजूम दुनिया मे छाये है
दर्द सुनना भी अब एक व्यवसाय है
मेरी तरह तन्हा है, पर चिड़िया तो गाती है
क्या जिंदगी है, खाती है, पीती है, सो जाती है
एक मैं हूँ जो सुकून के लिए भी पराश्रित 
अभी कुछ हुआ जिसे देखकर मैं था चकित
एक वृद्ध आये मेरे पास ही आकर बैठे
हम दोनों ही चुप थे मैं आदतन वो दुख सहते
देखकर लगा जैसे छू लूं तो रो देंगे अभी
दुख बढ़ता गया हो और कंधा नही मिला कभी
हिम्मत जुटा कर पूछ लेना चाहता था मैं
कि तभी एक छोटी गेंद ने चौका दिया हमें
कुछ पल बाद एक नन्ही परी आई
बच्ची से नजर मेरी हट नही पाई
बोली मेरी बॉल लेने आई हूँ मैं
कहकर जैसे शहद घोल दिया हो कानो में
बॉल लेकर वृद्ध की आंखों में झांक गई 
रो रहे है अंकल, कहकर आंखे नही दिल तक भांप गई
वृद्ध फफक पड़े उसके कदमो में सर रखकर 
बच्ची भी रो रही थी साथ उनका सिर सहलाकर
कुछ पल में गुबार जब ठंडा हो लिया 
बोले जाओ खेलो अब मैं ठीक हूँ बिटिया
छुटकी चली गई मुस्कुराकर
वृद्ध अब ठीक थे किसी बोझ को बहाकर
हिम्मत कर पूछ लिया मैंने चाचा क्या मिला आंसू बहाकर
बोले अभी लौटा हूँ मैं जन्नत तक जाकर
जरा खुलकर कहिए चाचा, मैं कुछ समझा नही
बोले ये आंसू प्यार थे मेरी बेटी को जो कभी पहुंचे नही
चाचा क्या बेटी आपकी बहुत दूर गई
बोले अरे नही वो अपने घर से भाग गई
ये आंसू संभाले थे उसकी बिदाई के लिए
इन्हें साथ लेकर अब बूढ़ा कैसे जिये
आंसू नही थे बोझ थे मुझको थकाते थे
प्यार कम रह गया मेरा हर वक़्त जताते थे
अब स्वतंत्र है वो तो पराश्रित मैं भी नही
इस अर्थहीन पानी का अर्थ कुछ भी नही





शर्माजी के अनुभव: मातृत्व

ढलता अंधेरा और काली सी महिला
बाजार किनारे खड़ी, हाथों में थैला
अजनवी थी मगर कुछ अलग था चेहरे में
जैसे खुशी खड़ी हो उदासी के पहरे में
बढ़ने लगा तो आवाज आई 
कहाँ तक जा रहे हो भाई
मुड़कर कहा आपको कहाँ जाना है
मेरा तो गोविंद नगर में ठिकाना है
बोली मेरी मदद कर दीजिये
बड़ी कृपा होगी साथ ले लीजिये
मैंने कहा बैठिये, कृपा की कोई बात नही 
वैसे भी आज खाली है बाइक, कोई साथ नही
लेकर उसको चल दिया, हम चुप ही रहे
वैसे भी कुछ नया नही था, कोई क्या कहे
कुछ देर बाद शुक्रिया कर उतर गई वो
आगे जाकर जेब टटोली कुछ ख़रीदने को 
चौंक गया मैं, कटी जेब मे पैसे नही थे
पूछता था दुकानदार लाये भी थे, या नही थे
आज पहली बार मुझे मदद पर पछतावा हुआ
बड़ा नुकसान नही था चलो जो हुआ सो हुआ
गुजरता गया वक़्त मैं अब हर किसी को बताता
नेकी मत करो देखो, मुझको बुरी दुनिया का पता था
एक दिन फिर वही हुआ, जो हो चुका था पहले
मेरी पहचान ना कर पाई वो, था "हेलमेट" पहने
फिर वैसे ही ले जाकर उतार दिया उसको
मेरा गुस्सा ले गया लग लिया उसके पीछे को
कुछ दूर जाकर झोपड़ी में घुस गई चलते चलते
सच ही है चोरों के महल नही चुना करते
मैं भी झोपड़ी में चल दिया कुछ कर गुजरने को
मैं रह गया अवाक, देख मुझे चौंक गई वो
बच्चे को चम्मच से दूध पिला रही थी
मैं देख रहा बच्चा, वो मुझे देख रही थी
पूछा बाबू साहब, आपको क्या चाहिए
मैंने भी कह दिया, चोरी का हिसाब लाइये
सकपकाकर पैर पकड़, वो रो दी ऐसे
एक माँ नही हो, कोई बच्ची हो जैसे
मैंने कहा काम करो, हाथ पैर साबित है
बच्चे को भी चोर बनाओगी या तेरी आदत है
महिला ने कहा मैं चोर नही बाबू साहब
बताती हूँ मेरे साथ जो हुआ है सब
ये बच्चा मेरा नही, ये सहेली का है
मुझको समझ नही आया ये पहेली क्या है
आगे बोली सहेली तो मर गई बैसे
आखिर बलात्कार झेलकर जीती कैसे
बस तब से इसे पाल रही हूँ जैसे तैसे
काम पर जाने से डरती हूँ, कही मर न जाऊँ सहेली जैसे
इसीलिए ही मैं चोरी भी करती हूँ
बिन ब्याही माँ हूँ न, दुनिया से डरती हूँ
आंसू नही रोक पाया मैं ये हाल देखकर
माँ आखिर माँ होती है, कैसी भी हो रो दिया कहकर


शुक्रवार, 4 जून 2021

बहना की पाती

प्रिय भैया

लिवा ले जाओ न आकर
तुम्हारी याद आती है
यहाँ खुश हूं बहुत लेकिन
मुझे खुशियां रुलाती है
जबसे आई हूं रोती हु कमरा बंद कर करके
कोई आता है तो होंठो में सिसकी सिल जाती है
पूरा दिन झोंक देती हूं चूल्हे की आग में लेकिन
क्या करूँ अम्मा मेरे सपने में आती  है
याद नही आता यहाँ कब किस्से रूठी थी
मेरी चूड़ियां मनाती है पायल समझाती है
कन्यादान हो आई यहाँ अपने बनाने को
तेरी तस्वीर ही भैया मुझे अपना बताती है
यहाँ सब अच्छे है लेकिन कोई बात है ऐसी 
अपना होने में और बनने में अंतर जताती है
अम्मा ने कहा था आते समय भैया को भेजूंगी
क्या बिगाड़ा था उनका हाय मुझको भुलाती है
चाहिये कुछ नही मुझको मैं जल्दी लौट जाऊंगी 
एक बार लिवाने आओ न मुझे यादे बहुत रुलाती है

                                            तुम्हारी अपनी बहन

गुरुवार, 3 जून 2021

मगरूर

 उनको अपना कहते कहते हम अपनो से दूर हुए
मिलने मुझसे ना आये वो कितने वो मगरूर हुए
दर दर दौड़े घर घर भटके पता पूछने हम उनका
वो न जाने इस चक्कर मे  कितने हम मज़बूर हुए

एक बूंद इश्क

अजी थोड़ी देर तो बैठो इससे तुम्हारा क्या जाएगा
मेरा दिल जो बैठा जाता है संभल जाएगा
यू पल भर आकर बेरुखी से उठ चल देते हो
मेरे दर्द को समझने का हुनर तुमको कब आएगा
वक़्त लेकर आना अबकी बार, बातें कर ले दो
ऐसे तो हर सवाल मेरे दिल मे ही मर जायेगा
खताबार हूँ तो ये लो मेरा सर तेरे आगे है
कर लो वो जो तुम्हारे दिल मे आएगा
मैं नौकरानी हूँ तेरे प्यार की, गुलाम नही तेरी
मेरा प्यार तुझ सा नही, साथ आया फिर चला जायेगा
हम तुम बैठेंगे साथ तो जमाना जलेगा ही
मलाल होगा जिसको वो तो बस बड़बड़ायेगा
मैं तेरे लिए तू मेरे लिए ही बना है देख
इतनी सी बात समझने में वक़्त कितना लगाएगा
मिन्नते कर रही हूँ आज, कल किसने देखा
बाद तरसोगे एक बूँद इश्क को, ना कही आराम आएगा


मैं इंजीनियर तो हु

मैं इंजीनियर तो हु पगली
टूटा दिल फिर भी मैं जोड़ नही पाता
तू तो फिरती थी बड़ी डॉक्टर बनी लाडो
मेरे नाम का कांटा तुझसे निकाला नही जाता
तू मुझे संगदिल कहे तो भी
तेरा हाथ मुझसे तो छुड़ाया नही जाता
तू रूठ जाती है बात बात पर
एक मैं हु जिससे मनाया नही जाता
इंजीनियरी ही क्या सब बेकार है पढ़ा
तू ठीक कहती बुद्धू हू मुझे कुछ भी नही आता




तुम मेरे क्या हो

दृश्य : नायिका के हाथ मे तस्वीर है और अपना हाल बता रही है ।

कैसे कहूँ मैं तुमसे कि तुम मेरे क्या हो
मैं तुमको क्या बताऊँ, जब खुद ही न पता हो
कुछ खो गया है मेरा तेरे आने से 
देखो, तुमको अगर मिला हो तो बता दो

सभी कहते है, मै बदली बदली सी हूँ
कुछ तो हुआ जरूर है, कमली कमली सी हूँ
बात करती हूं तो लगता है, कुछ भूल रही हूँ शायद
याद करती हूँ क्या, तुमको कुछ हो 'आइडिया' तो बता दो

नीद छोड़कर तारे गिनना भाने लगा है मुझे
हर समय कुछ गुनगुनाना आने लगा है मुझे
दरवाजा पड़ोसी का भी बजे तो उठ आती हूँ
इंतजार किसका है, उसे पहचानते हो तो बता दो

रसोई में भेजती नही मम्मी, उंगली जला लेती हूँ
लड़ने में मजा नही रहा भाई से, गाल सहला देती हूँ
पापा कहते है लगता है इसे भर्ती कराना होगा
क्या मैं बीमार हूँ, तुम क्या मानते हो बता दो

तुम जब अजनबी थे तो ही अच्छे थे
कम बोलते थे, मगर सच्चे थे
अब मैं ही बकबक करती हूँ तुमसे
क्या तुम गूंगे हो, चलो इशारे से ही बता दो

कर्ज चुका दो

दर्द की मेरे दवा हो कोई जान के बदले में दे दो
छोड़ के मुझको जाने वाले कब आओगे ये कह दो
मेरे प्यार की कितनी उधारी अब तक तुमने पाई है
सूद समेत बकाया मेरा जाने से पहले दे दो

माँ रो देती थी

मेरी मां दुनिया की सबसे अच्छी माँ है
मैं ये जब कहता था तो माँ रो देती थी
मैं अपनी नींद तक ढूंढ नही पाता खुद से
उंगलियों से मेरे बालों में माँ उसको ढूंढ देती थी
दूर जाता था तो माँ के आंसू देखे थे मैंने
घर मे आता था तो हँस के माँ रो देती थी
कभी चोट लगती थी मुझको बताता नही था मैं
देखकर मुझको न जाने क्यों माँ रो देती थी
जान नही पाया इतने आंसू कहाँ से लाती थी वो
मैं पूछता था माँ से तो माँ रो देती थी
आज जब बाप बना रो दिया मैं देखकर नन्ही जान को
अब मैं जानता हूं क्यों माँ रो देती थी

धरती माँ

कुदरत के कानून को तोड़ो मत इन्सान।
तुम दोगे तो ही मिले जीवन का सम्मान।।
ये धरती तेरी नही बस कब्जा कुछ रोज ।
क्यों खोया है स्वपन में रख ले कुछ तो होश।।
जंगल उपवन ये नदी देते जीवन दान ।
वस्त्र फाड़कर भूमि के करता क्यों अपमान।।
धरती माँ ने पालकर कर दिया पूरा फर्ज ।
दूध नही तो गोद का कुछ उतार लें कर्ज।।
पशु और इंसान में कैसे करेगा भेद।
थाली में तू खाय जो उसी में करता छेद।।
मां का आँचल जाने सब माटी नही बेजान।
अपनाए तब भी तुझे छोड़ जाए जब प्राण।।

बुधवार, 2 जून 2021

खुशी की खुदकुशी

तुमने जो दो लफ्जो में कहा, वो मेरी जिंदगी सा है
मैं वो समंदर रहा, जो कुछ कुछ खाली सा है
झंझट लगता है मुस्कुराना तेरे बिन अब तो
हँसना तो जैसे हम पर इक गाली सा है
बाकी दुनिया ने हमे ताने दिए सब छोड़ देते हम
पर कौन जाने तेरा जाना मेरी खुशी की खुदकुशी सा है







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