हर वक़्त सोचता हूँ टीस कहीं होती है
अश्क बहते नहीं पर सांसे सर्द होती है
वक़्त कटता नहीं बस काटता ही रहता है
प्यार का ऐसा अक्स प्रीत होती है
मोहब्बत कितनी करो काफी नहीं होती
इस गुणा भाग में सांसे बाकी नहीं होती
उम्र घटती तो जुड़ता है आशियाना
रात को जिस्म सोता है मगर बाहें नहीं सोती
बस कोई दर्द चाहिए जिन्दगी के लिए
प्यार के बदले ही आये मगर किसी के लिए
नाम लेकर अगर पहचाना तो क्या पहचाना
बात है सांस् समझ जाये किसी बू के लिए
याद तुम्हे करके गुस्ताखी कर बैठे,
एक हिचकी हर याद की खातिर कर बैठे
रख ली एक तस्वीर बना कर दिल पर भी
सोये तो उसे ख्वाब में शामिल कर बैठे
क़भी दो लफ़्ज़ ही काफी हैं बताने के लिए
कहीं कोई उम्र लग जाती है जताने में
कोई पा जाये तुझे देख पूरे दिन की ख़ुशी
तो हर्ज ही क्या है उसे देख मुस्कुराने में