शुक्रवार, 18 मार्च 2022

होली

वो खुशी, खुश होने के बहाने चले गए।
 गले मिलने वाले बिन मिले ही चले गए।
 होली तो आई इस बार भी वैसे ही, 
लगता था उसके रंगों के रंग चले गए
 दूरियां बढ़ती गई उम्र के संग ऐसी
 कि सब अपने फोन में चले गए।

शनिवार, 12 मार्च 2022

सत्य है वो एकमात्र

पंख मिले पंछी बने, एक शरीर समाय,
फिर भी पंथी ही रहे, दुनिया एक सराय,
दुनिया एक सराय, वक़्त की पाबंदी है,
और पता भी नही सांसे कब तक बंधी है।

चौसर का सा खेल है दम दम खेला जाये,
पहुंचे कोई कहीं नही, पर चलता मेला जाये,
चलता मेला जाए, जन इक किरदार कई है,
क्या पता जो हुआ वो या चाहिए था वो सही है।

रिश्ते नाते भावना और स्वप्नों का अंबार,
जैसे जहर की रोटी के संग भरम का अचार,
भरम का अचार और दुख सुख चटनी भी है,
खाते खाते थक जाओ तो मृत्यु की गोद बनी है।

लगता कितना जुल्म है, कंधे है कमजोर,
दुनिया देश परिवार सब बोझ बड़ा घनघोर,
बोझ बड़ा घनघोर पता है बाद में चलता,
सत्य था क्या जब रंगमंच में पर्दा गिरता।

बचपन के दिन खेलते भरी जवानी आय,
फिर कुदरत का खेल हो वही जवानी खाय,
वही जवानी खाय बुढ़ापा बेक़दरो सा,
सभी में क्या सच, या तीनो ही रहे तमाशा।

जोड़ जोड़ कर ढेर बना, अपनी गाढ़ी कमाई,
फिर आगे तुम देखना प्रभुवर की चतुराई,
प्रभुवर की चतुराई सत्य है कड़वी भी है,
सत्य है वो एकमात्र, बात बस यही सही है।



शनिवार, 19 फ़रवरी 2022

शॉर्ट्स 5

मैं चाहे कितने ही रंग में बिखरूं
मन्नत तो तेरे रंग की ही की थी
तेरी खुशबू से महका क्यों ना करूँ 
मेरी बाहों में तूने सांसे जो ली थी
प्यार किया इसमें गलती कोई नही मेरी
तू ही तो था वो जिसने मेरी जिंदगी को बजह दी थी

प्यार का रंग चढ़ता गया जैसे सुहाग की मेहंदी हो
दूर कैसे जाऊं मैं, जब हर सांस तुझसे ही बंधी हो
नाम मे क्या रखा है जब हम दो ही हो जहां में
तू मेरा बंदा है और मैं तेरी बंदी हो

जब तेरी खुशबू ने मेरी साँसों में दस्तक दी है, 
बस खुदा जानता है दिल ने इक मन्नत की है
ये अदा का परचम और मेरे जिगर का फलक
खुदा क्या खुद को देखने की कब फुरसत दी है

हुस्न दो दिन का है तो इतना कहर ढाओगी
इतना न इतराओ कभी ढल जाओगी
गुलाब से होंठ, नागिन सी कमर न जाने क्या क्या
कौन बच पाएगा जब इतने खंजर चलाओगी

आईने हुस्न से जरा दूर होना चाहिए
खैर हो रूह की वो नूर होना चाहिए
माना कुछ गुरूर हो बर्दाश्त है नादानी में
दिल में आने का कुछ शऊर होना चाहिए



बस यही मेरी ख़ता है

बुरा कैसे कहूँ उसे, कहने में बुरा लगता है
जब वो ताने देती है, सीने पर छुरा लगता है
दोनों एक छत नीचे है मगर उत्तर और दक्षिण से
मजबूरी की गांठ से दोनों का पहलू जुड़ा लगता है

पहली बार जब देखा उसे देखता रह गया
मेरी आँखों में उसका अक्स ठहरा रह गया
लगा वो मेरी जिंदगी है और मैं सांसे उसकी
उस अधूरी में मैं कहीं पूरा रह गया

सात फेरों में सब फासले मेटने की कसम ली
सुख या दुख जो सही, बांटने की कसम ली
किस्मत का करम कब कहर बन गया जैसे
मेरी खुशी ने मेरी खुशी की हंसी ही निगल ली

घर बसने से कुछ बर्बाद हुआ लगता है
ऐसा खाली हूँ जो सबको भरा लगता है
पुरानी शादियां हो जाती है पुराने कपड़ो की तरह
खुशी तो नही कोई, बस तन ढका लगता है

उसको जानना टेढ़ी खीर थी मुझे
नसीहत थी हर पल तकदीर की मुझे
खुशी की आदत खुशफहमी रह गई जैसे
किसी से जुड़ना मेरे टूटने की लकीर थी मुझे

उसकी खुशी को मैंने खुश रहना छोड़ दिया
कहती है कितने खुश हो तुम, मेरा करम फोड़ दिया
सौभाग्य का टोटका कोई नही होता पता है अब
भगवान नाम वाले पत्थरो ने मेरा हौसला तोड़ दिया

कुसूर ढूंढने से क्या मिला, कुसूर होने के बाद
गर जिंदगी में जिंदगी ही नही, तो फिर कैसा आबाद
सिर्फ तौबा तौबा ही बाकी है हर पल को मेरी
कब ये सब खत्म हो बस जिंदगी मेरी जैसे फरियाद

जब तक सांस है, इसे ढोना ही मेरा फलसफा है
या खुदा बेजरूरत सी हंसी खुशी ले तुझको अता है
सबेरे की तलाश उनको मुबारक जो दिन में संभलेंगे
हमें तो दिन, रात का ही कोई चेहरा लगता है

कोई तो दुआ थी जो बद्दुआ सी लगी मुझे
वरना टूट कर चाहना बस यही मेरी ख़ता है
बस यही मेरी ख़ता है
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