सोमवार, 31 मई 2021

वो अनजान बन गए

पल भी क्या अनमोल थे, जो छूट कर तारीख बन गए
लम्हे जो मेरे साथ गुजरे,  वो तेरी तारीफ बन गए
तेरे अपनो के साथ मेरी दुआए भी लगे तुझको
मेरे खत में आँसू गिरकर बरसात बन गए 

उन्हें हम से शिकवा गिला हो, हमको कुछ भी नही
हमसफर जो बन ना पाए तो तेरे मुरीद बन गए

हुजूम उनके आशिको का हमे पीछे छोड़ आया
हम पूजने चले तो वो महलो की जागीर बन गए

कहते थे प्यार करते है जी और जान से
हम जान कहते रह गए वो अनजान बन गए

प्यार की तिजारत

 बुझा बुझा सा कोई है, फिर जलाने को कहता है
याद आने की कितनी बजहे, भूल जाने को कहता है
दिलासा दे के समझाया मगर क्या फिर वही ख्वाहिश
खता मेरी बता दो ओ खुदा हर दिन वो कहता है 

मुझे तो खुद नही था प्यार पर इतना यकीं रहबर
काफिले छूटे कितने ही, हमेशा कौन रहता है

फकत इतनी गुजारिश थी मुझे अपना सनम कह दे
वो झूठा ही सही माना, मगर ये कौन कहता है

सुबह से शाम तक तेरी तिजारत देख ली दिलबर
लेती है गम से वो खुशियां जहाँ में कौन ऐसा है




नारी के बिन

 वो राधा है वो गीता है वो शक्ति है वो सीता है
हर रूप में रंग अनोखा है सब नारी के बिन रीता है
पर हाय रे पतित जगत के रंग, हर रूप कुरूप करे ये ढंग
माँ भगिनी भाभी बेटी ये, जग इनसे चलना सीखा है 

रुनझुन पायल पहने बेटी जब बाहों में इतराती है 
कितना कठोर वो सीना हो अपनेपन से पिघलाती है
क्या इंसानो की दुनिया है बेटी लाने से डरते है
मानो पापों को हर लेती और कोई नही वो दुहिता है
हर रूप में रंग अनोखा है सब नारी के बिन रीता है

उम्र के साथ बड़ी होकर जब हाथो का सहारा बनती है
वो बहन ही होती है बन्धु, जो बिन बोले सब सुनती है
ये कैसे भाई बंधु है जो अपनी पराई करते है
ये है तो रंग है खुशियों में, बिन इनके जीवन फीका है
हर रूप में रंग अनोखा है सब नारी के बिन रीता है

जब यौवन कुछ कर जाता है पुरुषत्व अधूरा पाता है
भार्या बनती है नारी ही, जीवन पूरा हो जाता है
हरियाली है वो धरती पर दुख में खुशियों का बादल है
अंधेरा है सब इसके बिन, हाँ घर का वही उजीता है
हर रूप में रंग अनोखा है सब नारी के बिन रीता है

अब और क्या कहूँ क्या है वो हर शब्द तुच्छ मैं पाता हूं
माँ हो जाती है इतनी बड़ी, बस उंगली तक मैं जाता हूं
हाँ आज हु मैं कल कोई फिर इस दुनिया को समझायेगा
पापी है हम ये गंगाजल, हां नारी परम पुनिता है
हर रूप में रंग अनोखा है सब नारी के बिन रीता है



मंगलवार, 25 मई 2021

ये मेरे साथ साथ रोया है

हर याद को साथ को लम्हे को 
वक़्त ने सूत में पिरोया है
मेरा साथी रहा है दिल मेरा
तेरी खातिर ये मेरे साथ साथ रोया है
तुझे कोई बेबफा कहे तो टीस कैसी है 
तू जब गैर की बाहों में जाके सोया है
नशा तेरा गया तो होश मेरा साथ गया
बुद्धू मेरी तरह है जाके अब ये खोया है
जिक्र तेरा कही न हो ये मेरी फिक्र रही
फिर भी तेरी यादों का कबाड़ ढोया है
वक़्त ने घाव दिए वक़्त ही दवा देगा
दिल से दिल को मैने आंसुओ से धोया है

दिल की दुनिया

नज़र में रहने वाले दिल मे क्यों बस जाते है

जरा छोटे से आंसू गम खुशी में काम आते है

बफा का रास्ता है ये नज़र से दिल की दुनिया का

पलक से  दिल में  चलकर वो बिना पैगाम जाते है



क्यूं रूठ गए तुम

कोई कहता रूठ गए तुम या जाना बहुत जरूरी था
मैं कहता हूं जाना था तो कहना बहुत जरूरी था
ना कहता मैं कह लेती तुम कुछ अपनी यादें तो होती
मुझको तो बस ये कहना था मिलना बहुत जरूरी था

याद है तूझको नाम भी मेरा रेणु से पुछवाया था
बातों बातों में ही अपना नंबर मैं दे आया था
लगा उसी दिन नंबर के सपने अपने दे आया
मिस्ड ना रिंग हो जाये रातों में जगना बहुत जरूरी था

आदत मेरी बदली मेरा शौक भी हर छुड़वाया था
तेरी खातिर दुनिया को मैं चूल्हे में रख आया था
आदत मेरी तुम थी जाना और तुम मेरी सपना थी
हर दिन तुमको जिया था मैंने बस ये ही मुझे जरूरी था

अपने छुटे सपने टूटे घर बाहर सब दूर गया
प्यार हो सच्चा सब मिलता है यही मेरा गुरुर गया
तेरे कारण छोड़ दिया सब अब तुम ही जब छोड़ गए
सांसे आना जाना जिंदा रहना बस मजबूरी था

मुझको तो बस ये कहना है मिलना बहुत जरूरी था

सोमवार, 24 मई 2021

दिल की मर्सडीज

‘ब्यूटी’ की धार तेज बहुत दिख रही मुझे
‘लिप लाइनर’ की कोर चला जा रहा हूँ मैं
इस ‘लाइफ’ की ‘फिज़िक्स’ के ‘मिस्ट्री’ हो तुम
‘प्लस माइनस’ का ‘फोर्स’ खिंचा जा रहा हूँ मैं
दिल समझा था जिस प्यार को पहली ही ‘क्लास’ में
उस दिन का ‘होम वर्क’ किये जा रहा हूँ मैं
नाराज तुम ना होना ‘आई लब यू ‘ना कहूँ
इंग्लिश में हाथ तंग है, बतला रहा हूँ मैं
कोई आये अभी ‘पिंच’ करे बाह पर मुझे
ये सच है, या ‘स्वीट ड्रीम्स’ जिए जा रहा हूँ मैं
कभी घूर कर ना देखा तेरे ‘रोज़ी लिप्स’ को
रब भी कहे ‘वन पीस’ ये बना रहा हूँ मैं
इस जिंदगी के ‘वन वे’ पर तुम साथ में रहना
इस दिल की ‘मर्सडीज़’ में बिठा रहा हूँ मैं

क्या साथ आओगे

अगर उलझे रहे खुद में तो भला क्या बताओगे
मैं जितना दिल लगाऊंगा तुम उतना दिल बचाओगे
मुरव्वत बेमुरव्वत होना मुश्किले है बाद की
इस पहली मुलाकात को सोचो कैसे बिताओगे
माना इश्क तेरा कतरा नही समंदर है
मैं अगर घेर लू बाहों में तो क्या थम जाओगे
अब हमें दूर तक जाना है इन्ही राहों पर
तुम मेरा हाथ थामे बिन थके चल पाओगे
अब तेरे होंठो पर मुस्कान बने रहना है
तो ये बादा रहा मुझको वहां सजाओगे





अमानत

झूमरों की रोशनी भी स्याह होती है तेरे बिन,
तू जो हो तो तपिश भी चांदनी सी लगे।
उलझ गया हु मैं रोक लू तुम्हे या रुक जाऊँ,
ठौर मेरा नही पर जिंदगी ठहरी सी लगे।
रोज तेरी तस्वीर बात करती मगर तू नही,
बात ये राज की सुन तुझको क्यूँ झूठी सी लगे।
पहले पहल होंठो का दीवाना हुआ था मैं ,
अब तेरी हर बात जुदा होके बस तेरी सी लगे।
अभी तू मेरी होके भी मेरी सी नही ,
बस यही बात मेरे दिल पर छुरी सी लगे।
मैं तेरा मजनू हु रांझा हु तू जो भी कहे,
मैं तो कहता हूं मेरी धड़कन में तू धड़क सी लगे।
रात सिमटी थी तेरे गेसुओं में कैद होकर,
इसलिए रात में बस रात की कमी सी लगे।
हम जो मिले तो उस खुदा का कुछ इरादा था,
मुझको तू गैर नही अपनी सी सगी सी लगे।
कोई मुझे रोक ले मिलने से तो मर जाऊंगा,
ये जरा बात मुझे मछली बिन पानी सी लगे।
डूबता तुझमे हु मोहताज सा हु तुझ पर मैं,
ये मेरी जिंदगी बस तेरी अमानत सी लगे।



बहुत पछताओगे

 तुम जा तो रहे हो छोड़कर पछताओगे
सेज मखमल की भी होगी तो न सो पाओगे
यादों का सैलाब आएगा दिल से आंखों तक
इस छोटे से दामन में सैलाब समा पाओगे
माना अभी दोस्त है परिवार और दिल्लगी भी है
ये दर्द कैसा है सीने में सबको क्या बतलाओगे
बहुत यादें है मेरे पास तेरे पास थोड़ी तो होंगी
मेरे एहसास का भरम झूठे दिल से कैसे तोड़ पाओगे
माना टूटा है मेरा दिल क्या तेरा बाकी है
हां मैं जरा बिखरा तो क्या तुम भी सिमट पाओगे

अब बस थक गया कहकर सह लूंगा मैं ये
भूल जाना मुझे और न मैं कह पाऊंगा न तुम सुन पाओगे
चलो अनजान बनकर देखलो पर सुन लो जरा
गर पछताओ और टूट जाए अहम तो कह देना
मैं वो सब सुन लूंगा जो तुम न कह पाओगे
तुम जा तो रहे हो मगर पछताओगे

कैसे कैसे संत

चाचा से कहने लगे द्वार खड़े एक संत,
दे बच्चा प्रभु आये है खुश होंगे भगवंत,
खुश होंगे भगवंत, ग्रहदशा तेरी भारी,
देख लिया स्पष्ठ भाग्य में कमी तुम्हारी 
दशा शनि गंभीर है और राहु काल
हम है पहुचे वहां तक देख लिया सब हाल
देख लिया सब हाल बाबा है जमघट बाले 
रौद्र रूप में जब आये सब फूँक ही डाले
चाचा छज्जु लाल ने सोचा बहुत प्रचंड
जल्दी किया प्रणाम हाथ से ले लिया उनका दंड 
ले लिया उनका दंड दंड को रख कर बोले
 बैठो बाबा आसन पर प्रभु बम बम भोले
बोलो सेवा दास को कर दो मुझको धन्य 
कर बाबा को दंडवत हो गए चाचा नम्य
हो गए चाचा नम्य बस कृपा इतनी कर दो 
भर दो सब भंडार दया बस इतनी कर दो 
बोले आ जा शरण में बाबा हुए प्रसन्न
मत कर चिंता धन धान्य की करेंगे तुझको धन्य
करेंगे तुझको धन्य ज़रा जल पान करा दे
क्या हैं इच्छा तेरी फिर एक लिस्ट बना ले 
चाचा कूदे एक फिट ख़ुशी न मन में समाये
दो कदमो में दौड़ कर चाची लिए उठाये 
चाची लिए उठाये जरा हमको भी बताए
कल तक मोटी भैंस थी आज फूलों सी उठाये 
 सांस धौंकनी हो गई चाची दई  उतार 
दिल पर रख कर हाथ बताया हुआ नहीं कम प्यार 
हुआ नहीं कम प्यार प्रिये कुछ अच्छा सा पकाओ
अच्छा ये है बात जाओ जी खुद ही बनाओ
आज मान लो बात हमारी फिर मत कहना 
मिसेज प्रिया ने प्योर गोल्ड का कंगन पहना
एजी सच्ची बोल दो कुछ तो हुआ जरूर 
बीपी हाई करने पर करो नहीं मजबूर
करो नहीं मजबूर तुम्ही हो मेरी जानू
पूरी होगी बात ज़रा बाबा को मना लूँ
करो नहीं मजबूर तुम्ही हो जानू प्यारी
बाबा जमघट आये स्वयं ही द्वार हमारी 
बाबा बाबा नहीं है स्वयं प्रकट भगवंत 
बैठे हैं बैठक में जमघट वाले संत
चाची की त्योरी चढ़ी सुर्ख हुए दो गाल
जल्दी उसे निकाल दो पार होए सब माल
पार होए सब माल घास खाई है तुमने 
अक्ल पर पत्थर डाल गए बाबा की सुनने
चाची आई जल्दी से बोली बाबा माफ़ी
बना नहीं कुछ भी आज है बाबा हम उपवासी  
सुनना इतना ही रहा बाबा का गुस्सा भड़का
डमरू वाले हाथ को बिजली जैसा तड़का
चाची गौर से देखकर बोली त्योरी तान
कल्लू मेरी झुमकी दे दे या ले लूं तेरे प्राण
ले लूं तेरे प्रान ढूंढती कब से तुझको
कब तक खैर मनाएगा आज तू गया ही समझो
सुनते इतना कांप गया बोला साष्टांग
चाची पैसे सब रखो बक्श दो मेरे प्राण
बक्श दो मेरे प्राण लो दोनो कान भी पकड़े 
चाचा हंस कर बोल दिए क्या रुलाएगा पगले
कहो प्रिये मेहमान को कैसे लिया पहचान
चप्पल पीछे छोड़ कर भाग गया शैतान
भाग गया शैतान प्रिये कुछ तो समझाओ
दिल है मेरा कूद रहा यू न मुस्काओ
पूछ रहे हो क्या मुझे है इतना भी है भान
फूलवती ये आपकी  नानी है शैतान
नानी है शैतान अभी ये बच्चा है बस
जासूसी अब छोड़ दी मगर ये छूटी है कब
आंख फडकती देख के हुआ मुझे अहसास
लटके झटके देख के कल्लू का आभास
कल्लू का आभास मैने फिर तुक्का मारा 
इक झटके में लोट गया चरणों मे बेचारा
चाचा हुए प्रसन्न कहा ओ फुल्लो प्यारी
तू तो मेरे दिल मे रहती जान हमारी
चाची मुस्काई जरा बोली त्योरी तान
कंगन हमको दे दो वर्ना गई तुम्हारी जान
गई तुम्हारी जान चाचा थोड़े घबराये
शाम को बात करूंगा अभी रखो ये झुमके आये
चाचा सोचे आज तो छिड़ जाती फिर जंग
हे प्रभु आपके लोक में कैसे कैसे संत

शनिवार, 22 मई 2021

टिके बैठे हो

जब तुम होते हो मेरे पास तो मै कहता हूं,
ए वक़्त ठहर जाओ क्यों बहते हो ।
जब तुम चले जाते हो तो लगता है,
वक़्त तुम गुजर क्यूं नही जाते क्यों बैठे हो ।
रोज रोज तेरा जाना जरूरी है क्यो, ये पूंछ लेता मगर
तेरे साथ भूल जाता हूँ खुद को कोई सवाल कैसे हो ।
साथ भी ऐसा कि सांस और धड़कन सा,
एक न हो दूजा मिराज जैसे हो ।
मैं कितना भी दूर चला जाऊं लगता है कोई पीछे है,
तुम हो कि साया या साये भी तुम जैसे हो ।
वक़्त से धीमा जहर कोई नही, ऐसा लगता है मुझे,
बेअसर वक़्त है जब तक मेरे दिल से टिके बैठे हो।

मिराज: मृगतृष्णा

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