सोमवार, 9 अगस्त 2021

पिघल

पिघल चुके हो गर्मी से तो बहते क्यों नही
दिल मे रखे सामने हो, सामना करते क्यों नही
मरे जा रहे हो उन पर, क्या मर कर ही मानोगे
बागी दिल होने से पहले उनसे कहते क्यों नही


तेरा चेहरा मुझे मेरा सपना लगे
तुम ऐसे हो, गूंगा दिल अपना कहे
जी चाहता है जी भर कर देखना तुझे मगर
कैसे डालूं नजर कि नजर न लगे



दुआ

दुआ मुफ्त मिलती नही, मनानी पड़ती है
खुशियां चलकर आती नही, कमानी पड़ती है
किस्मत भी अजीब है जिन हाथ की लकीरों में हो
उन्ही हाथो से ही रोज बनानी पड़ती है

हम सफर में रहे हमसफर के इंतजार में
कोई तो होगा हम सा,इतने बड़े से संसार मे
गलत मैं ही हमेशा रहा, इस बार का क्या गम
ऐ खुदा अकेला ही बनाया, क्या इतना बेकार मैं


पा लेना

पा लेना हसरत कब थी मेरी, बस खोने से डरते थे।
समझते तो सब कुछ थे, बस कहने से डरते थे।
जब मांग ही रहे हो अपना हिस्सा, तो सुन लो
तोलमोल अबतक नही सीखे हम तो बस प्यार करते थे। 

जिंदगी है मेरी, कोई उधार थोड़ी है
जो तुम कर रहे हो, वो प्यार थोड़ी है
सफेद दिन गए तो काली रात भी ढल ही जाएगी
मेरी किस्मत मुझ सी है, तुम जैसी मक्कार थोड़ी है


शिव 3सोमवार

याद आती है जब तेज हवाओं में
लगता है दास को आवाज दे रहे हो
बूंदे बरसती है तन पर तो मुझे
लगता है नटराज आप साज दे रहे हो
हर कण जब आप ही आप हो निराकार
क्यों मुझ कण को विरह का संताप दे रहे हो

बीते मेरी शिव शिव रटते, चाहे कितनी हो उमरिया
भूल ही जाऊँ कौन हूँ मैं, और कौन है मेरी डगरिया
मुझे पता कुछ आज है रूठे, कल मानेंगे भोलेनाथ
चरणों से ही बस जाऊंगा, जब थामेंगे मेरी उंगलिया



गुरुवार, 5 अगस्त 2021

शर्माजी के अनुभव : बहू का असुराल

बात छोटी सी है, मगर मुश्किल बड़ी है,
बहू बेटी दोनों बराबर, किस अंतर से छोटी बड़ी है।
दोनों इज्जत ही तो है अपने घराने की, 
जिद सी क्यों है फिर अहम दिखाने की।
ये बात ज्यादा पुरानी नही है,
पर ऐसी है मुझसे भूली जानी नही है।
सफर कर रहा था बस का, 
बस छोटा बैग और मैं तन्हा।
साथ बैठी महिला मुझसे बड़ी थी,
उनकी आंखें अपने हाथ की तस्वीर पर गड़ी थी।
शायद उनके परिवार की तस्वीर थी, 
आंखों में थे आंसू और दिल मे भारी पीर थी।
अचरज तब हुआ, तस्वीर के छोटे टुकड़े कर गिरा दिए,
आंसू पोंछ कर आंखों के, उनके होंठ मुस्कुरा दिए।
उलझन में कितनी बाते सोच गया पल में,
लगा पत्थर ही पड़ ही गए हो मेरी अकल में।
तभी टिकट टिकट की आवाज आई,
मैंने पैसे बढ़ाये तब उसे सांस आई।
फिर महिला से पैसे मांगे तो उत्तर मिला, नही है,
टिकट बाबू बोला भाभी बस से उतरे ये मेला नही है।
मैंने झिझकते हुए कहा क्या मैं दे दूँ,
महिला ने मुझे एक नजर देखा, बोली मैं क्या कहूँ।
मैंने पूछा कहाँ का लेना है टिकट,
महिला ने कुछ न कहा समस्या बड़ी विकट।
मैंने अपने गंतव्य का टिकट ही एक और लिया,
महिला ने देखा तो उनकी ओर बढ़ा दिया।
महिला ने देखकर मुझे कहा भैया शुक्रिया,
शुक्रिया मत कहें बस बता दे ये क्या किया। 
मेरे सवाल पर महिला की नजर ठहर गई,
बोली परिवार नही मेरा जिस पर आपकी नजर गई।
मैं बोला फिर दर्द क्यों था आपकी आँखों मे,
बोली ये फंदा था जिसे काट पाई हूँ सालों में।
हो चुकी बर्बादी नही, आजादी के आंसू छलके,
मेरा दर्द मेरा अपना है बस, आपसे अच्छा लगा मिलके।
मैंने कहा ठीक है और ना बताये न सही,
अब कोई ठिकाना है जहाँ जाना हो कहीं।
बोली बाहर की दुनिया मैंने देखी कभी नही,
मैं बोला आप सी हिम्मत मैंने देखी कहीं नही।
बोली ससुराल नही असुराल में रही हूँ ना,
थप्पड़ घूंसे लात ताने और कितना कुछ सही हूँ ना।
हर हाल में जीने की हिम्मत में जिंदा रही,
दरिंदो के बीच में परकटा परिंदा रही।
मैं बरबस पूंछ बैठा क्या कोई अपना नही आपका,
बोली किस्मत में कंकर लिखे तो क्या दोष बाप का।
मैंने कहा चाहे तो आप मायके चली जाए,
बोली दिल के मरीज की क्यो बिन कसूर जान ली जाए।
मेघ से बूंद गिरना अकेले, पवन भी क्या कर सकती है,
कहने के दो घर बेटी के, इतने में सबर कर सकती है।
मैं बोला भाई कहा है, कोई मदद कर सकूं तो बताये,
मैं बर्तन चूल्हा ही कर सकती हूं भैया काम दिलवाये।
मुस्कुरा उठा मैं उनके साहस का कायल था,
पर उनके दर्द से आज अंदर तक घायल था।
पिता बिदा कर अरमानो संग भेज देता है ससुराल,
कैसे दूसरा घर ही बन जाता है बेटी के लिए असुराल।
सोच रहा था गलती हुई पुरुषत्व को बड़ा कहने में,
डर लगा था उनकी जगह भी आज खुद को रखने में।

प्रवीनशर्मा
मौलिक स्वरचित रचना

मंगलवार, 3 अगस्त 2021

तुम जरूर जाना

आज क्या हुआ तुझे, क्या कहती है
तुझे कैसे समझाऊं बस तू ही दिल मे रहती है
मुझे लड़कियां बस दूर से ही पसंद आती है
एक तू ही है जो मेरी बाहों में भली लगती है

तुझे रोज रोज मुझसे लव यू क्यों सुनना है
प्यार है तो है इसमें रोज शक क्या करना है
नेम प्लेट टांग देता अगर मेरा दिल घर होता तो
मेरी सच्ची बातें भी क्यों झूठ में तली लगती है

वो ऐसा करता है उसके लिए, तो करने दे ना
मेरी बातों पर नही तो मुझ पर यक़ी कर ले ना
पैसे से प्यार खरीद सकते तो आधी दुनिया फ़क़ीर होती
भूल जा मुझे अगर गैर की आंखे मखमली लगती है

मेरे प्यार को मैं अच्छे से जानता हूं, शायद तुम नही
मैं उस मोड़ पर खड़ा हूँ मोहब्बत नही तो मैं नही
मेरा क्या है जहाँ से आया लौट जाऊंगा वहीं
तुम जरूर जाना वहाँ, जहाँ प्यार की बोली लगती है

आखरी पल

मेरे जिंदगी के आखरी पल है
मुझे जी लेने दे
कल मेरी शादी है मेरी सांसो को
शरीर के कफन में सी लेने दे
कह तो रही हूँ हमारा साथ यही तक था
रोने न दे आंसुओ का सैलाब जहाँ है वही रहने दे
अगले जनम में इंतजार करना मेरा
अभी दुश्मन जिंदगी के हाथो जहर पी लेने दे
प्यार खुदा की नेमत है, मैंने पलको पर सजा लिया
अब इसकी सजा में मिल रही है कैद तो ये भी लेने दे
मैंने मेरी खुशी से तेरा सदका उतारा है, तो खुश रहना
पता है दुआ ये लगे मुश्किल है पर फिर भी ले लेने दे
तेरी तबियत खराब हो जाती है, देख रोना मत
मैं कुछ पल हूँ, सभी आंसू मेरी पलको पर गिरा लेने दे
मैंने साथ तेरा मांगा खुदा से हर पल, सिला मिल गया
मुझे कुछ नही देखना तेरे सिवा आंखों में बसा लेने दे
तू कहता था न मैं तेरी हिम्मत हूँ , साथ तो हूँ, क्या हुआ
इस लाश को आखरी बार तेरे होंठो को छू लेने दे

दीवाना तो बड़ा खराब है

बात थोड़ी सी तो कर ले मुझसे
क्यों इतनी नाराज है
कल तक सुबह का अलार्म थी ये
आज क्या हुआ मेरी इतनी खराब आवाज है
गिले शिकवे चुप रह कर नही किये जाते पागल
अब खोल भी दे जो गुस्से का बैराज है
झूठ आज तक तुझसे कब बोल पाया मैं
कभी सच्चा नही लगा मेरा प्यार क्या ये बात है
न बात कर तो सर ही रख लेने दे गोद में
एक पल भी नही खोना चाहता जो आज है
तेरी उंगलियां क्यों कांप रही है मेरे हाथों में
घबरा रहा है दिल मेरा कह दे क्या राज है
देख रो न दूँ कही छूट कर तुझसे वरना
मुस्कुरा ना, तेरी हंसी मेरी सिराज है
कसम है मुझे मेरी, कह दे वो सब कर दूंगा
तुझे हरपल खुश रखना हमेशा से मेरा ख्वाब है
मेरे इश्क की हद मत टटोल कर देख, पछताएगी
सोचेगी तन्हा बैठकर दीवाना तो बड़ा खराब है

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