मंगलवार, 23 अप्रैल 2013

बेशर्म जमाना

"बेशर्म जमाना " कहता है ये बेटी किसकी कौन है ये
जज्बाती है, नादाँ है ये गूंगी तो नहीं पर मौन है ये
ये बातें सुनती रिश्तों की तो कांप उठे कर नैन सजल
किस्से पूछू कोई बतला दो पहचानो रुदन हाँ कौन है ये
कोरा काजल बन बही है ये श्रंगार नहीं बन पाई है
जीवन में अश्रुधार सिवा कोई राग नहीं दे पाई है
अभी बचपन ही तो लांघा है मासूम सी है पर कौन है ये
घर की इज्ज़त गृह लक्ष्मी थी, बेटी या बहन या पत्नी थी
रोशन थी घर की दीवारें इससे क्यारी भी फूली थी
अब नहीं जरूरी कौन है बस अब तो सिर्फ अछूत है ये
 कोई कहता प्रेमी छोड़ गया कोई बोले घर से भागी है
कोई खड़ा मौन फटे वस्त्र तके कोई कहे बड़ी अपराधी है
हमउम्र है मेरी बेटी से कैसे कह दूं मैं कौन है ये 

गुडिया के अपराधी हम सभी हैं क्यूंकि हम उसी समाज का हिस्सा है जिसका वह शिकार हुई 

शनिवार, 12 जनवरी 2013

"पाक या नापाक"

**
मेरे बच्चो को रुलाना छोड़ दे,
मै हिंदुस्तान हू मुझको सताना छोड़ दे ।

मेरे हाथो में बरदान है, अभिशाप भी है;
मेरी मोह्हब्बत को आजमाना छोड़ दे। ।

मेरे कश्मीर से तेरी कराची दूर कब थी;
बस मेरी बस्ती के घर जलाना छोड़ दे ।

आह सुन बच्चो की तेरे, कितने चूल्हे बंद है;
सीख कुछ, उधार का बारूद लाना छोड़ दे ।

खून तुझमे है मगर, उसमे मुरब्बत अब नहीं;
बच्चो को दिल से लगा, नफरत सिखाना छोड़ दे ।

चाहा कितनी बार ,तू अपना था अपना रहे;
हाथ क्या दिल मिला, और दिल जलाना छोड़ दे ।

फिर समां जाओगे हिंदुस्तान में, जिद मत करो, 
 मेरे बेटे सख्त है, इनको चिड़ाना छोड़ दे । 

पाक को नापाक, कर रक्खा अपने कर्मो से;
या संभल जा या मेरे घर आना जाना छोड़ दे 
।
***~~***

मंगलवार, 1 जनवरी 2013

"आकांक्षा"

उठ खड़े हुए है हम, नए साल के स्वागत में ।
कोई अभाव न रह जाये, नब आगत के स्वागत में ।।
आंखे मलता सूरज आया फैले किरणों सी खुशियाँ ।
जीवन तरंग बज उठे गगन , नब आगत की आहट में ।।
उज्जवल भविष्य के आने पर अधरों पर मुस्काने तैरे ।
ढांढस बंध पाए मानव को, दिए जले गर्त अंधियारों में ।।
इस जीवन में ही खोज सकें, जीवन रहस्य अनसुलझे ।
हो दया शक्त , निस्वार्थ प्रेम, जगती के हर जीवित में ।।
न हो अधीर ये आस करे, जीवन सुखी और शांत बने ।
हर क्षुब्ध को तृष्णा मुक्त करे प्रभु नए साल के आगत में ।।
...