शनिवार, 12 जनवरी 2013

"पाक या नापाक"

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मेरे बच्चो को रुलाना छोड़ दे,
मै हिंदुस्तान हू मुझको सताना छोड़ दे ।

मेरे हाथो में बरदान है, अभिशाप भी है;
मेरी मोह्हब्बत को आजमाना छोड़ दे। ।

मेरे कश्मीर से तेरी कराची दूर कब थी;
बस मेरी बस्ती के घर जलाना छोड़ दे ।

आह सुन बच्चो की तेरे, कितने चूल्हे बंद है;
सीख कुछ, उधार का बारूद लाना छोड़ दे ।

खून तुझमे है मगर, उसमे मुरब्बत अब नहीं;
बच्चो को दिल से लगा, नफरत सिखाना छोड़ दे ।

चाहा कितनी बार ,तू अपना था अपना रहे;
हाथ क्या दिल मिला, और दिल जलाना छोड़ दे ।

फिर समां जाओगे हिंदुस्तान में, जिद मत करो, 
 मेरे बेटे सख्त है, इनको चिड़ाना छोड़ दे । 

पाक को नापाक, कर रक्खा अपने कर्मो से;
या संभल जा या मेरे घर आना जाना छोड़ दे 
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मंगलवार, 1 जनवरी 2013

"आकांक्षा"

उठ खड़े हुए है हम, नए साल के स्वागत में ।
कोई अभाव न रह जाये, नब आगत के स्वागत में ।।
आंखे मलता सूरज आया फैले किरणों सी खुशियाँ ।
जीवन तरंग बज उठे गगन , नब आगत की आहट में ।।
उज्जवल भविष्य के आने पर अधरों पर मुस्काने तैरे ।
ढांढस बंध पाए मानव को, दिए जले गर्त अंधियारों में ।।
इस जीवन में ही खोज सकें, जीवन रहस्य अनसुलझे ।
हो दया शक्त , निस्वार्थ प्रेम, जगती के हर जीवित में ।।
न हो अधीर ये आस करे, जीवन सुखी और शांत बने ।
हर क्षुब्ध को तृष्णा मुक्त करे प्रभु नए साल के आगत में ।।

शनिवार, 29 दिसंबर 2012

"ये किसकी है बेटियाँ "

ये 'दामिनी' ये  'अंजलि' ये किसकी है बेटियाँ
जब प्यार ममता चाहिए, किसकी शिकार ये बेटियां ।
नादान ये या हम सभी जो देखकर अनजान है
हम मूंद कर आँखे  समझते बच गई सब  बेटियां ।
हिंसक पशु पर हम दया करते नहीं फिर आज क्योँ
इन घूमते नरपशुओं से आओ बचा लें बेटियाँ ।
जब रोज चिंगारी उठे कब तक बचाएं ओढ़नी
ये आग लगने अब ना दे आओ बचा ले बेटियां ।
हम कब सिसक सुन पाएंगे ये झूठा बहरापन हटा
जब रूठ जाएगी देवी वो जो देती है हमें बेटियां ।
दामिनी को श्रद्धा सुमन  के साथ

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