शुक्रवार, 24 मई 2013

समाज

इस समाज और कुछ नही बस शोर मचाना आता है
अच्छे दिन आएंगे एक दिन, दिल बहलाना आता है
जिम्मेदारी किस पर डालें, चर्चा है हर बस्ती में 
इसकी गलती उसकी गलती रोज बहाना आता है

जिन्दा होने का सबब बूझो ना कैसे
लगे लब से लब पूछो ना किस्से
वो घुलकर उतर गए सांसो में ऐसे
पिघले सूरज का सांझ में उतरना जैसे

रूठो मत अब मान ही जाओ अच्छा है
कब मानोगे प्यार भी मेरा सच्चा है 
सोच लो छलक कर रो न दे कहीं
मानो या ना मानो दिल तो बच्चा है  


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