मनवा लेखक हम तो सेवक
रहमत हुई की इल्म ने पहचाना है मुझे, हर शख्श की तक़दीर यूँ रोशन नहीं होती....
रविवार, 18 जुलाई 2021
कुछ भी नही
अगर मरने से पहले जीना सीख गए तो अच्छा है
वरना जिंदगी कड़वी दवाई से ज्यादा कुछ भी नही
घर बार इज्जत पैसा सबका वादा है मगर
ये कब तक है इस वादे का वादा कुछ भी नही
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