मनवा लेखक हम तो सेवक
रहमत हुई की इल्म ने पहचाना है मुझे, हर शख्श की तक़दीर यूँ रोशन नहीं होती....
बुधवार, 23 जून 2021
प्यार का लिफाफा
जिंदगी के पन्नो पर मुस्कुराहट का जिक्र तक नही
तुम आये तो बंजर में कलियाँ चटक गई
अब तक किसी को मेरी फिक्र तक नही
तुम आये तो हमपर सभी नजरें टिक गई
आंखे लड़ी तो डर गए, प्यार का लिफाफा खुल न जाये
इसलिए नजरें बचाई मगर पलके झुक गई
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