मनवा लेखक हम तो सेवक
रहमत हुई की इल्म ने पहचाना है मुझे, हर शख्श की तक़दीर यूँ रोशन नहीं होती....
सोमवार, 14 जून 2021
एक और दीवाना
बड़ी दूर से आये थे नजारा करने
तेरी झलक भर से जिंदगी का गुजारा करने
तुम अपने गुरुर से बौने रहे और हंस दिए
एक और दीवाना आ गया बंजारा बनने
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