पल भी क्या अनमोल थे, जो छूट कर तारीख बन गए
लम्हे जो मेरे साथ गुजरे, वो तेरी तारीफ बन गए
तेरे अपनो के साथ मेरी दुआए भी लगे तुझको
मेरे खत में आँसू गिरकर बरसात बन गए
उन्हें हम से शिकवा गिला हो, हमको कुछ भी नही
हमसफर जो बन ना पाए तो तेरे मुरीद बन गए
हुजूम उनके आशिको का हमे पीछे छोड़ आया
हम पूजने चले तो वो महलो की जागीर बन गए
कहते थे प्यार करते है जी और जान से
हम जान कहते रह गए वो अनजान बन गए
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