सोमवार, 24 मई 2021

बहुत पछताओगे

 तुम जा तो रहे हो छोड़कर पछताओगे
सेज मखमल की भी होगी तो न सो पाओगे
यादों का सैलाब आएगा दिल से आंखों तक
इस छोटे से दामन में सैलाब समा पाओगे
माना अभी दोस्त है परिवार और दिल्लगी भी है
ये दर्द कैसा है सीने में सबको क्या बतलाओगे
बहुत यादें है मेरे पास तेरे पास थोड़ी तो होंगी
मेरे एहसास का भरम झूठे दिल से कैसे तोड़ पाओगे
माना टूटा है मेरा दिल क्या तेरा बाकी है
हां मैं जरा बिखरा तो क्या तुम भी सिमट पाओगे

अब बस थक गया कहकर सह लूंगा मैं ये
भूल जाना मुझे और न मैं कह पाऊंगा न तुम सुन पाओगे
चलो अनजान बनकर देखलो पर सुन लो जरा
गर पछताओ और टूट जाए अहम तो कह देना
मैं वो सब सुन लूंगा जो तुम न कह पाओगे
तुम जा तो रहे हो मगर पछताओगे

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

...