सोमवार, 24 मई 2021

अमानत

झूमरों की रोशनी भी स्याह होती है तेरे बिन,
तू जो हो तो तपिश भी चांदनी सी लगे।
उलझ गया हु मैं रोक लू तुम्हे या रुक जाऊँ,
ठौर मेरा नही पर जिंदगी ठहरी सी लगे।
रोज तेरी तस्वीर बात करती मगर तू नही,
बात ये राज की सुन तुझको क्यूँ झूठी सी लगे।
पहले पहल होंठो का दीवाना हुआ था मैं ,
अब तेरी हर बात जुदा होके बस तेरी सी लगे।
अभी तू मेरी होके भी मेरी सी नही ,
बस यही बात मेरे दिल पर छुरी सी लगे।
मैं तेरा मजनू हु रांझा हु तू जो भी कहे,
मैं तो कहता हूं मेरी धड़कन में तू धड़क सी लगे।
रात सिमटी थी तेरे गेसुओं में कैद होकर,
इसलिए रात में बस रात की कमी सी लगे।
हम जो मिले तो उस खुदा का कुछ इरादा था,
मुझको तू गैर नही अपनी सी सगी सी लगे।
कोई मुझे रोक ले मिलने से तो मर जाऊंगा,
ये जरा बात मुझे मछली बिन पानी सी लगे।
डूबता तुझमे हु मोहताज सा हु तुझ पर मैं,
ये मेरी जिंदगी बस तेरी अमानत सी लगे।



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